9.21.2009

बंगलोर में पांच दिन


बंगलोर में दूसरा दिन


दूसरा दिन घुमे के नामे रहल. घर से ताजा हो के निकलनी सन . एगो रेस्टोरेंट पहुंचनी सन नास्ता करे. उहां खाली दक्षिण भारतीय नास्ता के जोगाड रहे जेकरा के खा के हमनी आगे बढनी सन. इहां से पहुंचनी सन फ़ोरम, बंगलोर के सबसे बडका मौल. PRESTIGE GROUP द्वारा बनावल इ मौल बडा ही भव्य रहे. दुकान के संख्या त गिनल मुश्किल रहे. समान बिक्री के विविधता आ डिजाइन देख के हम अभिभूत रनी. इ दोसर बात रहल की हमनी के कुछ किननी सन ना. उपर में PVR सिनेमा रहे जेमें एक साथ कमीने आ कोई दक्षिण के सिनेमा चलत रहे. नीचे से उपर तक सब फ़्लोर जाए में हमनी के कई घंटा लाग गईल. ओकरा बाद हमनी के बगल में रहल बिग-बाजार में गइनी सन. जवन शायद हमरा देखला अनुसार दिल्ली के सारा बिग-बाजार से बहुत बडन ही ना रहे ओमें काम करे वाला स्टाफ़ आ सामान के विविधता भी देखला से बने. प्रमित और ओकर एक दोस्त कुछ सामान खरीदलें लेकिन एतना चलवइलख लोग की पैर जबाव दे देलख एकर एगो औरो ठोस करण रहे की हम प्रमित के सैंडल पहिनले रनि जौन छोट भइला के कारण समय-समय पर मुस लखा पैर कतरे लागल रहे. एकरा बाद घरे आवे के निर्णय भइल.

दिन भर घुमला के क्रम में हम महसूस कइनी की कपडा के अश्लीलता में बंगलोर अभी दिल्ली से काफ़ी पीछे बा त सुरक्षा आ स्त्री स्वतंत्रता में बहुत आगे. जवान लडकी आ औरत सब के ड्रेस देख के इ बात बुझाए की इहां भूमंडलीकरण के हावा त जरूर लागल बा लेकिन अपना परचम तक नइखे पहुंच पाईल. लडका-लडकी के साथ घुमे के चलन आ स्कूटी आदि के मामला में अभी एकर पीछा करे में और महानगर के सोचें के पडी. रात में काफ़ी देर तक औरतन के घर से बाहर रोड पर घुमत आ बस स्टाप पर केकरो इंतजार करत देखल आम बात रल. रास्ता में बहुत मंदिर भी दिखल. द्रविड शैली में निर्मित आज के भी मंदिर देखला से लागे की इ प्राचीन काल में ही बनल बा. मंदिर के आगे बनल प्रवेश द्वार पर बहुते देवता लोग के मूर्ति आउर दिक्पाल आदि के सुंदर-सुंदर प्रतिमा से सजावल रहे . पुजारी लोग पीअर धोती लपेटले, गला में आ हाथ में सोना के वजनदार गहना पहिनले, कीमती मोबाइल रख के भगवान के सेवा में लागल दिखले.

अगिला दिन के बारे में जाने ला करी तनका सा इंतजार. पिछ्ला ब्लोग बडका हो गइल रहे जवन ठीक ना रल, ऎसे अब लंबाई छोट क दिआईल बा.












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