9.07.2009

दिल की बात .....


पूर्णतः भोजपुरी के पहिला ब्‍लॉग शुरू कइला पर मन बहुत खुश होता. ब्‍लॉग लिखे के विचार बहुत दिन से रहल लेकिन अंग्रेजी, हिन्दी, भोजपुरी में से कौन भाषा में लिखल जाय एकरा लेके उलझन रहल. भोजपुरी भाषी संस्कार मिलला से मन भोजपुरी में ही लिखे के राजी भईल ह. बहुत हमार दोस्त लोग कहले की भोजपुरी छोड के दोसर भाषा में लिख जेसे कि जादा से जादा लोग पढी त हम ई स्पष्ट क देवे के चाहतानी कि ई मामला लोग के पढे से जादा महत्वपूर्ण आत्म-संतुष्टी से जुडल बा. एकर एतने उद्देश्य बा कि समय के साथ बदलत भोजपुरीया युवा वर्ग आगे आवे आ भोजपुरी के विकास में आपन योगदान दे तबे जा के भारतीय संविधान के आठवीं अनुसूची मे शामिल हो के राष्ट्र के सम्मानित भाषा के रूप में भोजपुरी के आपन स्वतंत्र पहचान बनी.
भोजपुरी बोले वाला लोग के संख्या पर विचार कईल जाय त कई भाषा के उपर एकर स्थान बा. भारत के बहुत बडहन समाज के साथ ई विदेश में भी फईलल बा. मारीसश में त राजनीतिक सत्ता भी एकरा हाथ में बा. तब ई सोचल जरूरी हो जाला कि कौने कारण भोजपुरी में साहित्य रचना, ब्‍लॉग, पत्र-पत्रिका, संचार के विभिन्न साधन में उपस्थिति सिफ़र बा. कुछ लोग गीत-गवनई, फ़िलिम, टीवी.चैनल आदि के सहयोग से दोसरा भाषा के साथ प्रतिस्पर्धी बना देले बा. ऎ भाई लोग के कोशिश होए के चाही की निमन-निमन रचना से भोजपुरी साहित्य के मजबूती देवल जाय.
भोजपुरी पट्टी हमेशा से उर्वर रहल बा। कबीर, शुक्ल, द्विवेदी जईसन अवरो बहुत महापुरूष लोग जनम लेलक आ अपन पूरा जीवन दोसर भाषा के स्थापित करे में लगा देलक लेकिन आपन मातृभाषा भोजपुरी उपेक्षित बनल रह गइल। कुछ लेख लिख के इ लोग जरूर अपन ऋण -शोधन के प्रयास कइलख जेकरा से भोजपुरी एगो निश्चित साहित्यिक आधार ना बना पाइल जवना कारण इ पछुआत गइल.
अमिताभबच्चन, प्रकाश झा, मनोज बाजपेयी जइसन भोजपुरी क्षेत्र के बहुत लोग हिन्दी सिनेमा के अपना अनुसार नचावता लेकिन भोजपुरी में काम कइला के नाम पर सांप सूंघ जाता. अगर अपने घर में उगल फूल दोसरा के सुगंधित करे त ओकरा से जादा उम्मीद कइल बेकार बा. अब ई समय आ गइल बा कि संघतिया लोग अपना मन से पूर्वाग्रह निकाले आ भोजपुरी के अंन्तर्राष्ट्रीय मान्यता दिलावे. एमें मीडिया से जुडल लोग भी काफ़ी मददगार साबित हो सकता.
हमार भोजपुरी के साथ रिश्ता केवल बोलला से रहल बा आ हाल के कुछ दिन में नेट पर उपलब्ध पठन सामग्री, पत्र-पत्रिका के पढला तक ही सीमित बा. लेकिन लिखला के इ अभी शुरूआत बा. एमें हिन्दी, संस्कृत, उर्दू आउर अंग्रेजी के कुछ शब्द आ शैली आ जाई. लगातार लिखला से ही निराकरण संभव बा. भोजपुरी व्याकरण के बोध ना रहला के बावजूद हमार कोशिश रही कि ब्‍लॉग शुद्ध भोजपुरी में लिखल जाए.
ब्‍लॉग पर टटका-टटका घटल देस-परदेस के घटना पर विचार के साथ, विद्वान लोग के भोजपुरी में लिखल लेख आउर अंग्रेजी-हिन्दी से महत्वपूर्ण लेख के अनुवाद आ गांव-समाज के खुशबू भी हमेशा मिलत रही. पाठक लोग से लेख पर आपन टिप्पणी जरूरी बा जेसे कि सुधार के गुंजाईश हमेशा बनल रहे.

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