9.28.2009

भोजपुरी गजल


आज दशहरा ह नेपाली में कहे के होइ त बडा दशैं. चारू ओर मेला के धूम-धाम के बीच मां दुर्गा के मूर्ति देखे के होड बचपन में बहुत रहे .लेकिन आज दिल्ली में रहला के बावजूद हम इ आनंद से अछूत बानी काहे कि इहां दशहरा के नाम पर राम लीला तक ही लोग अपने के सीमित राखे ला.रोड पर रावण दहन के तैयारी चल रहल बा .मकान के सारा लोग ए गहमागहमी के हिस्सा बने चल गईल बा .हम घर में बैठ के ब्लॉग लिखतानी. हमर रूचि भीड-भाड वाला जगह पर जाए से बचे में ही ज्यादा ह . अभी हम इहे सोचतानी कि का रावण के जला देला से वर्तमान दुनिया के रावण से मुक्ति मिल जाई अगर ना, त एगो विकासशील देश में हर साल एतना पइसा के बर्बादी रोके के उपाय खोजे के पडी.
अभी तक ब्लॉग पर बहुत कुछ लिखल गईल लेकिन हम एमकी दाव भोजपुरी के एगो काफ़ी समर्थ गीतकार, कवि, गजललेखक, साहित्य के सब विधा पर समान रूप से लेखनी चलावेवाला श्री दिनेश भ्रमर के कुछ भोजपुरी रचना दे तानी.भोजपुरी आ हिन्दी साहित्य पर बराबर अधिकार रखे वाला श्री दिनेश जी के कई गो रचना देश के विश्वविधालय के पाठ्यक्रम में भी लागल बा आउर बहुत किताब भी इहां के लिखले बानी.ज्योतिष पर भी इनकर काफ़ी अच्छा पकड बा. महाविधालय में कुछ दिन व्याख्याता पद पर काम कइला के बाद उहां के वर्तमान में खेती-बाडी के काम अपन आवास स्थान बगहा में रह के  देखतानी.
  भोजपुरी साहित्य में गजल आउर रूबाई के जगह दिवावे में इनकर महत्वपूर्ण नाम लेवल जाला. इनकर रचित कुछ निमन-निमन रचना अपना हिसाब से दे तानी अपनहूं लोगन के ई स्वच्छ-सुंदर आ शिष्ट रचना जरूर पसंद आई.

      गजल
आंख में आके बस गइल केहू,
प्रान हमरो परस गइल केहू.
हमरे लीपल पोतल अंगनवां में,
बन के बदरा बरस गइल केहू.
गोर चनवा पै सांवर अंधेरा,
देखि के बा तरस गइल केहू.
फूल त कांट से ना कहलस कुछु,
झूठे ओकरा पे हंस गइल केहू.
कठ के जब बजल पिपिहरी तब,
बीन के तार कस गइल केहू.


       रूबाई
मन के बछरू छ्टक गइल कइसे,
नयन गगरी ढरक गइल कइसे.
हम ना कहनी कुछु बयरिया से,
उनके अंचरा सरक गइल कइसे.

           गजल
नजरिया के बतिया नजरिया से कहि द,
ना चमके सोनहुला किरनिया से कहि द.
          नयन में सपनवां बनल बाटे पाहुन,
          सनेसवा जमुनियां बदरिया से कहि द.
लिलारे चनरमा के टिकुली बा टहटह,
लुका जाय कतहूं अन्हरिया से कहि द.
          न आवेले सब दिन सुहागिन ई रतिया,
          तनी कोहनाइल उमिरिया से कहि द.
नयन के पोखरिया भइल बाटे लबलब,
ना झलके भरलकी गगरिया से कहि द.

        विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं.

            

6 टिप्‍पणियां:

  1. विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ.

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  2. हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं.........
    इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूं....

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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