9.24.2009

बंगलोर में पॉँच दिन

तीसरा दिन
तीसरा दिन के शुरूआत भइल मृत्युंजय के कमरा पर. उहां ओकरा साथ रहे वाला मित्र लोग से व्यापक बतखोरी भइल. सब के पास अपन प्रेमिका रहे जेकरा से बात करे में लोग दिन दुनिया भुला गइल रहे. मृत्युंजय के छवि हमेशा से एक GOOD BOY वाला रहल. क्लास में उ पढाई के अलावा कवनो चीज के बारे में बात करे से कतराए. लेकिन इहां वोकरा जीवन शैली में गजब के परिवर्तन देखनी. अब उ पढाई से इतर तथाकथित अनैतिक बात में भी खुल के हिस्सा लेता. समय के साथ परिवर्तन ही मनुष्य के दोसर नाम ह.
दिन में खाना खा के हमनी के सिटी स्टेशन के निकट मैजेस्टिक पहुंचनी सन लौटे के टिकट लेवे. मैजेस्टिक पर देखनी की कुछ जवान लडकी आ औरत खडा बाडीसन. पता चलल इ लोग वेश्या ह.हमर शक भईल रहे पहिला बार स्टेशन से बाहर निकले के क्रम में लेकिन शक के आधार पर केहू के गलत पहचान कईल ठीक ना रहे. किताबी जानकारी के आधार पर एतना पता रहे की दक्षिण भारत में मंदिर के देवदासी प्रथा बाद में कुत्सित हो के वेश्या निर्माण के साधन बन गईल. सब तरह से आश्व्स्थ भइला पर हम इ लोग से बात करेके प्रयास कईनी लेकिन भाषिक संरचना में अंतर बात ना पूरा होए देलख.हम जाने समझे के चाहत रनी कि इ लोग इ हाल में काहे पहुंचल, सरकार पुनर्वास के कोई गंभीर प्रयास काहे नइखे करत, अगर व्यवस्था बा त उ कार्य रूप में काहे नईखे दिखत.
चौथा दिन
     काफ़ी ऎने-ओने बउअईला के बाद हम अजय के भैया के डेरा  COX TOWN चल गईनी रात एही जांन कटल. इहां नेट आ केबल कनेक्शन समय काटे में सहभागी बनल. बाहर जाय के मन अब तक लगभग समाप्त हो गइल रहे.बंगलोर के मौसम हमेशा काफ़ी निमन रहेला.दिन में गुनगुनात धुप आ दिन में कई बेर मेघ मौसम के और सुहाना बना देवेला.रात में सूते समय एक चादर हमेशा उपयोगी होला.लेकिन जब हम पहुंचनी त दिन में बारिश के अता-पता ना रहे साथ ही धुप आवरो तेज हो के निकलल.लोग बतईलख की इ तोहरा दिल्ली से अईला के कारण उहां के कुछ अंश खीच लेले बा.कुल मिलाके सारा लोग इहां के मौसम के बखान कइलख लेकिन हम भूगोल में पढला के आधार पर ही ओ लोग के समर्थन कईनी उहां मिलल अनुभव से ना.
चौथा दिन ही हमर एगो गांव के पुरान दोस्त चाहे कह ली कि लंगोटिया यार विष्णु जी के फ़ोन आइल की हम हवाई जहाज पर बैठ गईल बानी आ खाडी देश कमाए जा तानी.मन उदास हो गइल.एकरा साथ बितावल समय पर त कइ महीना लिखल ज सकता लेकिन आज ना फ़ेर कबो.आज ही सोनू के ट्रैन रहे उ घरे गईल अपना मां के आ हमरा बडकी दीदी के बरखी में जवन दशहरा के शुरू होय के दिन होला ए साल 19सितम्वर के रहे.आजे शाम हम प्रमित के डेरा चल देनी.रास्ता में हम शिवाजी नगर बस स्टाप पर हम दिशा के बोध भटक गईल आ हम रास्ता भूला गईनी.बहुत देर तक आवे-जाए वाला लोग के ही देखत रहनी लोग से पुछ के परेशान रनी कोई उपाए ना सुझे.एही उधडबुन में हमर साथ देलख बस के महिला कंडक्टर.अपना साथ ले जा के हमरा निश्चित जगे पर जाए वाला बस में चडा देलख लेकिन एकरा ला ओकर धन्यवाद कईला पर उ कुछ बोलल लेकिन हम समझ ना पईनी.बस में औरत लोग के काम करत देखल ई हमर पहिला अनुभव रहे.मन काफ़ी खुश भइल की दुनिया के एगो पिछ्डल समुदाय के भी अब प्रतिनिधित्व मिलल शुरू हो गईल बा अईसे अब भरतीय सेना आ अर्धसैनिक बल में भी ए लोग के सेवा कुछ दिन से शुरू हो गइल बा.रास्ता में चिन्ना स्वामी स्टेडियम गईनी जेमें KPL(कर्नाटक प्रिमियर लीग) के मैच समाप्ति पर रहे.गेट न.7 पर नेशनल क्रिकेट अकादमी के कार्यालय देख के ही अपने आप के संतोष दिलइनी. 
पांचवा आ अंतिम दिन
तब तक आ गईल पांचवा आ चले के दिन.सबेरे-सबेरे तैयार हो के अरविंद भैया के घरे माराथल्ली पहुंचनी जहां स्कूल के दिन के सारा याद ताजा हो गईल.उनका इ गो रूम मेट लोग से भी मिले के मौका मिलल.कुछ देर बात रूकला के बाद उ IBM ला निकल गईले आ हम उनकर एगो दोस्त के साथ बाइक के सवारी पर निकलनी.हमरा के उ स्टेशन पहुंचा के अपना आफ़िस लौट गइले.
वापसी हमर कर्नाटका संपर्क क्रान्ति से भइल.जवन ऎह दिने भाया पुणे दिल्ली पहुंचेला. बंगलोर से पुणे पहुंचे के क्रम में पहाड के बीच से गुजरत-गुजरत मन आकुल हो गइल. कहीं-कहीं त ट्रैन ऎतना उंचाई पर चले की नीचे के लोग काफ़ी छोट लउके.पटरी के दूनू ओर सघन रूप से नारियल के खेती भइल रहे जेकरा बीच-बीच में केला आ दोसरा फ़ल-फ़लहरी लगावल रहे.पुणे पहुंचला पर स्वाईन फ़्लू के भय मन में रहे जेकरा चलते ओतना देर गाडी रूकला के बावजूद हम नीचे ना उतरनी. लोग मुंह में मास्क लगा के बडका भारी संख्या में घुमत रहे.ट्रैन के घटीया खाना खात हम विश्वकर्मा पूजा के दिन दस बजे दिल्ली पहुंचनी.
   बंगलोर के बात अब समाप्त होता अगिला बेर फ़ेर कुछ नया देवे के कोशिश करेम.
इ ब्लोग में  अब फ़ेर बदल के छापल जाता काहे की कुछ लोग के प्रतिष्ठा आ मन के ठेस पहुचल ह उ लोग हमर अपन दिल के काफ़ी नजदीक रहे वाला रल लोग . एही से हम ब्लोग में कुछ व्यक्तिगत बात भी लिखनी लेकिन कुछ लोग के आपति होई इ बात हम ना सोच पइनी .जेकरा-जेकरा बात बुरा लागल होई ओ लोग से हम माफ़ी के उम्मीद करेम.हम ई बात भी कह दी की ई ओईसन बात रल जवन बहुत त खराब ना रल लेकिन लोग से छुपावे ला मित्र लोग के इहे सोच बा त ओमें हम ई लोग के साथ तहे दिल से देम.
 पढ के प्रतिक्रिया भी जरूर दी लोगन जे से और नया ताजगी लावल जा सके.
राउर और केवल अपने लोग के संघतिया
  प्रहलाद मिश्रा
  (कुणाल किशोर विध्यार्थी)

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